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मेहनत और विश्वास ने दिए ऊँचे मुकाम,फुटपाथ से करोड़ों का व्यापारी बनने की दास्ताँ

BY  MY COLLEGE NOTIFIER.

अक्सर लोग कहते हैं कि मेहनत का  फल मीठा होता है, देर से ही सही लेकिन हमें मिलता जरूर है, इसी कहावत को असल ज़िन्दगी में सच कर दिखाया जयपुर के  चांद बिहारी अग्रवाल ने। जिन्हे कभी परिवार के ख़ातिर  सड़कों पर पकौड़े बेचने पड़े थे, वहीं आज सैंकड़ों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
जयपुर में पैदा हुए चांद बिहारी अग्रवाल का बचपन काफी मुसीबतों से भरा रहा ,उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता  को सट्टा खेलने की आदत थी और इसी सट्टेबाजी से उन्होंने पैसे भी कमाए, वो कहावत है कि भाग्य हमेशा एक जैसा नहीं रहता कब पलट जाए इसका अंदाज़ा भी नहीं होता। कुछ ऐसा ही हुआ चांद बिहारी के पिता के साथ भी, वो  सट्टेबाजी में सारे पैसे हार गए और घर की हालत बद से बतर हो गई। घर की हालत इतनी ज्यादा ख़राब हो गई कि चांद बिहारी स्कूल ही नहीं जा पाए और उनकी मां के कंधों पर पूरे घर का बोझ आ गिरा।


बचपन से ही चांद बिहारी जीवन में कुछ बड़ा करने का सपना संजोय रहे थे, लेकिन घर की स्थिति को देखते हुए उन्हें अपने सपनों का गला दबाना पड़ा।  उन्हें चंद रुपए के लिए काफी कठिन परिश्रम कर…
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मासूम बेटे की दर्दनाक मौत ने बदल दिया जीवन का उदेश्य

BY  MY COLLEGE NOTIFIER
कुछ कर गुजरने की चाह हो तो नामुमकिन काम भी मुमकिन सा  लगने लगता है, ऐसी ही एक शख्सियत हैं राजस्थान की रूमा देवी जिन्होंने सिर्फ 8वीं तक पढ़ाई करने के बावजूद भी दुनियाभर में देश का नाम रोशन किया।
राजस्थान के छोटे से गांव बाड़मेर की रहने वाली 8वीं पास रूमा देवी का बचपन गरीबी में ही गुज़रा। 5 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को खो दिया, जिसके बाद उनके पिता ने दूसरी शादी रचा ली और रूमा देवी को अपने चाचा के पास रहना पड़ा। वह लगभग दस किलोमीटर दूर से पानी भरकर बैलगाड़ी से घर तक लाती थीं। परिवार वालों ने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनकी शादी जल्दी ही कर दी, लेकिन ससुराल में भी आर्थिक तंगी से उनका पीछा नहीं छुटा और जैसे - तैसे करके परिवार का गुज़ारा होता रहा। शादी के लगभग डेढ़ साल बाद उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, जिसके बाद उनके परिवार में चारों तरफ खुशी ही खुशी छा गई । लेकिन किस्मत को और कुछ  ही मंज़ूर था और किसी बीमारी से ग्रसित होने की वजह से 48 घंटे के अंदर ही उनके बच्चे ने दम तोड़ दिया।
उस वक़्त रूमा देवी के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि किसी अच्छे…

YouTube के बारे हैरान कर देनेवाला सच।

BY  MY COLLEGE NOTIFIER.
        दोस्तों क्या आप जानते है की भारत के शायद 20 करोड़ लोग YouTube पे इस समय Active users है। YouTube पे इतने Users होते हुआ भी हम में से बहुत सारे लोग को यह मालूम नहीं होगा की YouTube आज World की एक ऐसी Video sharing service बन गयी है जिसके साथ हर कोई अपना Business build करके पैसा कामना चाहता है।                                                                                                                                                                    YouTube पर कही तरह के Videos देखते है फिर चाहे वह Entertainment हो या फिर Cooking, Meditation, Funny, Education लगभग सभी तरह की Categories के Quality videos हमें दिखने मिलते है और यही वजह है की आज YouTube के बिना शायद ही किसी को चलता होगा। तो आईये जानते है YouTube के बारे में आज कुछ इससे ही Interesting और मजेदार Facts ।
कैसे हुआ YouTube का जन्म ?


दुनिया की सबसे बड़ी 'Online Payment company Paypal' में काम कर रहे तीन दोस्त Jawed Karim, Chad Hurley और Steve Chen ने Video sharing service लॉन्च…

यह शैक्षणिक वर्ष 'शून्य वर्ष' नहीं होगा, परीक्षा आयोजित करने की उम्मीद है,

BY MY COLLEGE NOTIFIER
वर्तमान शैक्षणिक वर्ष कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए "शून्य वर्ष" नहीं होगा, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को एक संसदीय पैनल को बताया, यह दर्शाता है कि वे आचरण की आशा करते हैं सूत्रों ने कहा कि सत्र के अंत तक परीक्षा होगी।
उन्होंने पैनल को यह भी बताया कि ऑनलाइन कक्षाएं केवल कक्षा 3 से ऊपर के स्कूली बच्चों के लिए होती हैं और केवल 8 वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए सीमित संख्या में ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति होती है।
हालांकि, पैनल के सदस्यों ने गरीब परिवारों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवहार्यता पर सवाल उठाए, जो मोबाइल फोन या लैपटॉप कंप्यूटर बर्दाश्त नहीं कर सकते, सूत्रों ने कहा।
अधिकांश गरीब परिवारों में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, सदस्यों के बीच एक मोबाइल फोन हो सकता है। उनके बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा कैसे मिलेगी, सांसदों ने अधिकारियों से पूछा।
सूत्रों के अनुसार, पैनल के अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने सुझाव दिया कि बच्चों को सामुदायिक रेडियो और ट्रांजिस्टर के माध्यम से पढ़ाया जा सकता है, जो कि मोबाइल फोन की तुलना में लागत प्रभाव…

कभी ठेले पर बेचती थी चाय और समोसे मेहनत ने बनाया करोड़ों की मालकिन

BY  MY COLLEGE NOTIFIER.
कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपनी मेहनत और संघर्ष से मंज़िल को हासिल कर ही लेता है, एक ऐसी ही शख्सियत हैं तमिलनाडु की पैट्रिशिया नारायण जिन्होंने ज़िन्दगी में कभी हार नहीं मानी और 50 रुपए से तय किया करोड़ों तक का सफर।
पैट्रिशिया नारायण का जन्म तमिलनाडु में हुआ था और वो एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती थी। पैट्रिशिया नारायण को कॉलेज में पढ़ाई करने के दौरान उन्हें एक लड़के से प्यार हो गया था, जिसके बाद उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जाकर लव मैरेज कर ली थी। लव मैरिज करने के कारण दोनों के माता-पिता ने उनसे नाता तोड़ लिया था।  कुछ दिन तक पैट्रिशिया नारायण और उनके पति के बीच सब कुछ सही रहा था,लेकिन धीरे - धीरे उनके बीच का प्यार झगड़े में बदल गया। पेट्रीसिया नारायण का पति ड्रग एडिक्ट था और अपनी पत्नी पर अत्याचार करता था। पैट्रिशिया नारायण ने अपने पति के तमाम अत्याचारों को सहती रही और उन्होंने ऐसे में ही दो बच्चों को जन्म दिया था।
पैट्रिशिया नारायण के पति का अत्याचार जब हद से ज्यादा बढ़ने लगा तो उन्हें अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता होने लगी और उन्होंने उस…

गांव में रह कर यूपीएससी की तैयारी और दूसरे प्रयास में ही गाड़ा झंडा

BY  MY COLLEGE NOTIFIER
समस्तीपुर (Samastipur) शहर से तीन किलोमीटर दूर एक गांव धुरलक के रहने वाले राहुल मिश्रा (Rahul Mishra) ने यूपीएससी (UPSC) परीक्षा पास की है. मिश्रा ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 (Civil Services Examination 2019) में 202वीं रैंक हासिल की है. राहुल की इस कामयाबी पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है.संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2019 का परिणाम (Civil Services Examination 2019 result) जारी हो चुका है. सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम बिहार के लिए खास होता है. हर साल की तरह इस साल भी बिहार के कई छात्र-छात्राओं ने कामयाबी के झंडे गाड़े हैं. ऐसे ही एक छात्र राहुल मिश्रा (Rahul Mishra) हैं. समस्तीपुर (Samastipur) शहर से तीन किलोमीटर दूर एक गांव के रहने वाले राहुल की इस कामयाबी पर पूरा गांव जश्न मना रहा है. राहुल मिश्रा ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 में 202वीं रैंक हासिल की है. राहुल मिश्रा का यह दूसरा प्रयास था.

गांव के हर घर में राहुल मिश्रा की ही रही चर्चा
समस्तीपुर जिले से तीन किलोमीटर दूर धुरलक गांव आज-कल विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है. इस गां…

घूंघट की आड़ में शूटर दादी ने साधा निशाना बॉलीवुड तक बनायी अपनी पहचान

BY  MY COLLEGE NOTIFIER.
60 साल के बाद जहां लोग आराम करते हैं, वहीं यूपी की शूटर दादी ने अपनी ज़िन्दगी की नई शुरुआत और रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए अपने लिए जीना शुरू किया और अपने  निशानेबाज़ी से देशभर में लहराया ।
शूटर दादी उत्तर प्रदेश के बागपत से ताल्लुक रखती हैं, उनका जन्म 1 जनवरी 1932 को हुआ था। लगभग 16 साल की उम्र में जौहड़ी के किसान भंवर सिंह से उनकी शादी हो गई थी। जिसके बाद अन्य गृहणियों की तरह उन्होंने भी अपनी ज़िन्दगी को परिवार की देखभाल और घर के काम काज में झोंक दिया। वो रोज़ाना खाना बनाने, बर्तन और कपडे साफ़ करने से लेकर जानवरों की देखभाल जैसी हर काम को पूरी ईमानदारी के साथ करती थी। शुरुआत के दिनों में धीरे - धीरे घर के कामों में वक्त का पहिया घूमता गया और वो मां बन गईं। मां बनने के साथ ही उन पर पहले से भी ज्यादा जिम्मेदारियों  का बोझ आ गया। उन्होंने एक के बाद एक अपने सभी बच्चों की शादी कर दी, इन सब में उनकी उम्र भी ढलती चली गई और वह देखते ही देखते बूढ़ी होती चली गईं।
समय के इसी  चक्र में वो बहू से दादी कब बन गईं वक़्त का पता ही नहीं चला, सभी दादियों की तरह उन्ह…