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Showing posts with the label Success Story

कभी दिल्ली की सड़को पर चलाता था तांगा आज है इस बड़ी मसाला कंपनी का मालिक

            BY  MY COLLEGE NOTIFIER किसी को कम उम्र में आसानी से सफलता मिल जाती है, तो किसी को सफलता हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसी ही शख्सियत है  देश के मशहूर उद्योगपति, एमडीएच मसाले के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी,  जिन्हें काफी संघर्ष के बाद जिंदगी में बड़ी सफलता मिली। महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था।  भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद धर्मपाल गुलाटी रोजगार की तलाश में दिल्ली आ गए थे, और यहां आकर उन्होंने तांगा चलाना शुरू कर दिया था। जब वो भारत पहुंचे तो उनके पास केवल 1500 रुपए थे, जो कि उनके पिता ने दिए थे। इन्हीं पैसों में से उन्होंने तांगा खरीद लिया था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें इस काम से बोरियत महसूस होने लगी। तब धर्मपाल गुलाटी ने वो तांगा अपने भाई को देकर मसाले बेचना शुरू किया। दिल्ली आकर उस ज़माने में पैसे कमाना आसान नहीं था, बल्कि बहुत बड़ी चुनौती थी। भाई को तांगा देने के बाद उन्होंने अजमल खां रोड पर ही एक छोटा सा खोखा लगाकर मसाला बेचना शुरू कर दिया। बता दें कि पाकिस्तान ...

जिंदगी में संघर्ष और मेहनत करने वालों के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता

                 BY   MY COLLEGE  NOTIFIER बचपन में पैरों पर नहीं हो पाती थी खड़ी, फिर भी ऐसे बनीं दुनिया की सबसे तेज धाविका जिंदगी में संघर्ष और मेहनत करने वालों के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता,बसर्ते कोई भी काम सच्ची निष्ठा से किया जाए। वो कहते है यदि कोई काम सच्चे मन से किया जाए तो सारी कायनात उसे पूरा करने में आपकी पूरी मदद करती है। विल्मा रुडोल्फ ऐसी ही शख्सियत हैं, जिन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद नामुमकिन शब्द को मुमकिन में बदल दिया। विल्मा रुडोल्फ का जन्म 1940 में अमरीका के टेनेसी प्रांत के एक गरीब घर में हुआ था। इनकी मां  घर-घर जाकर काम करती तो पिता कुली का काम किया करते थे। एक दिन अचानक से विल्मा को पैरों में बहुत तेज़ दर्द होने लगा,जिसके बाद उनके परिवार वाले इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए, जहां जाकर उन्हें पता चला कि उनकी बेटी को पोलियो हो गया और अब वे कभी चल नहीं पाएगी। बचपन में जब विल्मा अपने भाई -बहनों को खेलते हुए देखती तो उन्हें काफी तकलीफें होती और वो कई बार रोने भी लग जाती थी। वो अपनी मां से कहती उन्हें भी खे...

जॉब के साथ शुरू किया सलाद बेचने का बिज़नेस

             BY    MY COLLEGE  NOTIFIER जिंदगी में हमें बहुत कम लोग ऐसे देखने को मिलते हैं, जो अपने करियर के साथ ही अपने जुनून को भी पूरा करते हैं। अक्सर यही होता है कि लोग एक ही चीज़ पर ज्यादा फ़ोकस कर पाते हैं। लेकिन पुणे की मेघा बाफना ने इस बात को गलत साबित कर दिखाया, उन्होंने करियर के साथ ही अपने सपनों को भी पूरा किया और खड़ा किया खुद का बिज़नेस। महाराष्ट्र के पुणे शहर की रहने वाली मेघा ने सिर्फ वाट्सऐप के जरिए सलाद का बिज़नेस खड़ा किया, उन्हें बचपन से ही तरह - तरह के सलाद बनाना काफी ज्यादा पसंद था। बिज़नेस शुरू करने से पहले मेघा रियल एस्टेट सेक्टर में काम रही थी, लेकिन वो जॉब करने के दौरान खुद का बिज़नेस शुरू करने का सपना संजोय थी,इसलिए उन्होंने अपने बिज़नेस की शुरुआत बहुत ही अनोखे तरीके से शुरू की। उन्होंने एक क्रिएटिव ऐड तैयार कर उसे वाट्सऐप पर अपने दोस्तों के ग्रुप में शेयर कर दिया, उन्होंने लिखा - यदि कोई हेल्दी और अलग-अलग वैराईटी, अलग स्वाद के सलाद खाना चाहता है तो उन्हें ऑर्डर दे सकते हैं। इसके बाद पहले दिन उन्हें  5 पैके...

रोज़ाना 5 रुपए दिहाड़ी पाने वाली ज्योति रेड्डी ने विदेश में खड़ी कर दी करोड़ों की कंपनी

          BY  MY COLLEGE NOTIFIER कहावत है कि सपने उन्हीं के सच होते हैं,जो सपने देखना किसी भी हाल में नहीं छोड़ते हैं। ऐसी ही कहानी है एनआरआई, ज्योति रेड्डी की, जिन्होंने जिंदगी में चल रही तमाम मुश्किलों को दरकिनार कर अपनी काबिलियत और मेहनत के बल बूते मात्र 5 रुपए रोज की मेहनताना से करोड़ों तक का सफर तय किया है। ज्योति का जन्म तेलंगाना के वारांगल जिले के एक गरीब परिवार में हुआ था, बचपन में उनकी मां का देहांत हो गया था। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से उनके परिवारवालों ने उन्हें एक अनाथालय में छोड़ दिया, यही रहकर ज्योति ने मन लगाकर पढ़ाई करनी शुरू कर दी और 10वीं का एग्जाम उन्होंने फर्स्ट डिवीजन से पास किया। लेकिन गरीबी के चलते वो आगे की पढ़ाई नहीं कर पाई। घर की माली हालत ठीक न होने के चलते उन्होंने पढाई छोड़कर खेतों में काम करना शुरू कर दिया। जहां उस वक़्त उन्हें  मजदूरी के रूप में सिर्फ 5 रुपये मिलते थे। लेकिन ज्योति की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि 16 साल की उम्र में उनकी शादी उनसे 10 साल बड़े एक व्यक्ति से कर दी गई थी। शादी के दो ...

इस शख्स ने दिव्यगों को कमजोर समझने वाले लोगों के मुंह पर जड़ा थप्पड़

                   BY  MY COLLEGE NOTIFIER अपने सपनों को साकार करने के लिए हमें एक संपूर्ण शरीर की नहीं बल्कि आत्मविश्वास और जुनून की जरूरत होती है। कहावत है कि हम सफलता की सीढ़ियां तभी चढ़ सकते हैं,जब हमारी मेहनत की नींव मजबूत होगी। इन पंक्तियों को सूरत के रहने वाले कल्पेश चौधरी ने सच कर दिखाया है। उन्होंने दिव्यांग होने के बाद भी यह साबित कर दिखाया कि मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों को भी कठोर परिश्रम और अपनी काबिलियत के दम पर हराया जा सकता है।   कल्पेश चौधरी का जन्म गुजरात के सूरत में हुआ था और वो बचपन से ही पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। पोलियो ने उनके शरीर को बुरी तहर से जकड लिया था। जब उनके माता - पिता ने डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि अब उनका एक पैर कभी काम नहीं कर पाएगा, मतलब कल्पेश एक पैर से दिव्यांग हो चुके थे। दुर्भाग्यवश  पोलियो ने कल्पेश के चलने फिरने की क्षमता छीन ली थी, लेकिन उनके हौसले को छिनने में नाकाम रही। दिव्यांग कल्पेश ने एक पैर गवाने के बाद उनके सामने आने वाली चुनौतियों से लड़ने के लिए ख...

जो लोग जिंदगी में हालातों से हार नहीं मानते, वो देर से ही सही सफलता हासिल कर ही लेते हैं

                       BY  MY COLLEGE  NOTIFIER  ऐसी ही शख्सियत हैं ऋषिकेश की अंजना माली जिन्होंने दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद भी तमाम लोगों के अंदर आगे बढ़ने की उम्मीद जगाई है.आइए बताते हैं कैसे बदली इनकी जिंदगी... अंजना माली ऋषिकेश के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं, वो बचपन से ही दिव्यांग हैं। उनके दोनों हाथ नहीं हैं और शरीर के दूसरे अंगों में भी दिक्कतें हैं।  इसलिए उन्होंने दूसरे काम के बजाए भीख मांगना शुरू कर दिया था। क्योंकि वो चाहती थी कैसे भी करके वो अपने परिवार की मदद कर सके। जब अंजना फुटपाथ पर भीख मांगा करती थी, तो उस वक्त लोग 1-2 रुपए देकर चले जाते थे। अंजना इन्हीं पैसे से पेंटिंग के लिए जरूरी रंग और ब्रश खरीदती थी, हाथ न होने के बावजूद भी अंजना गज़ब की चित्रकारी करती हैं।  वो पैरों की उंगलियों से तरह - तरह की पेंटिंग बनाती हैं, जिसे ऋषिकेश घूमने जाने वाले लोग, अंजना का हुनर देखकर होश खो बैठते हैं। अंजना एक दिन ऋषिकेश के घाट पर बैठी - बैठी अपने पैरों से चारकोल का एक टुकड़ा पकड़कर कुछ लि...

महिलाओं को व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक करने वाला The Real Padman

               BY  MY COLLEGE NOTIFIER हमारे समाज में आज भी माहवारी यानी की पीरियड्स को लेकर जल्दी कोई बात नहीं करता और महिलाओं के साथ भेदभाव होते आ रहा है। पीरियड्स को लेकर आज भी पर्दा करने के साथ ही महिलाओं को किचन में जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। साथ ही पहले के समय सेनेटरी नैपकिन की जगह गंदा कपड़ा इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेनेटरी नैपकिन की शुरुआत कब और कैसे हुई। अरुणाचलम मुरुगननाथम का जन्म तमिलनाडु के कोयंबटूर के एक गरीब परिवार में हुआ था। जब वो छोटे थे तभी उनके पिता की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी, जिसके बाद घर में पैसों की तंगी होने लगी। अरुणाचलम को  मजबूरन कॉन्वेंट स्कूल छोड़कर म्युंसिपल स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। घर में पैसों की जरूरत थी, इसलिए उस वक़्त उनकी मां खेतों में काम किया करती थीं। जिसके बदले में उन्हें रोजाना 7 रुपए का मेहनताना मिलता था और साथ ही उनकी मां सिलाई भी करती थी। ऐसे में दिन - रात अपनी मां को काम करता देख अरुणाचलम को बहुत तकलीफ होती, इसलिए उन्होंने 10वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़...

समाज में परिवर्तन लाने के लिए भारत की बेटी ने शिक्षा को बनाया अपना हथियार

                      BY  MY COLLEGE NOTIFIER कहते है कि जिंदगी में कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,क्योंकि असफलता के बाद एक न एक दिन सफलता आपके कदम जरूर चूमती है। कुछ ऐसी ही है मुंबई की 'आरती नाइक' की कहानी, जिन्होंने अपनी जिंदगी में काफी दुःख देखे और झेले। लेकिन अपनी हिम्मत को कभी भी टूटने नहीं दिया। आरती नाइक का जन्म मुंबई के स्लम मुलुंद गरीब परिवार में हुआ था,उन्हें बचपन से ही  हर छोटी - छोटी चीज़ों  के लिए संघर्ष करना पड़ता था। गरीबी के कारण उनकी ठीक तरह से पढ़ाई नहीं होने की वजह से आरती 10वीं में फेल हो गईं थी, क्योंकि उनके परिवार में भी कोई गाइड करने वाला नहीं था। आरती  आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत इस स्थिति में नहीं थी की उनको पढ़ा सके। लेकिन आरती ने हिम्मत नहीं हारी और मुंबई के चोल में रहने के बावजूद भी उन्होंने ज्वैलरी बनाने का काम शुरू किया। वो गले का नेकलेस बनाती थी, जिसे बेचकर वो रोज़ाना केवल 9 रुपए कमाती थी। इस तरह उन्होंने लगातार 3 साल तक इस काम को जारी रखा, क्योंकि वो आत्म...

Stand-up Comedy की दुनियां में "काम वाली बाई" ने मचाई धूम

           BY  MY COLLEGE  NOTIFIER एक House Maid से कॉमेडी की दुनियाँ में इनका प्रवेश इतना आसान भी नहीं था। ये हर दिन सुबह 4 बजे ही घर से निकल पड़ती हैं और लोकल ट्रेनों में Imitation Jewellery बेचती हुयी सुबह 7 बजे से शाम 2 बजे तक मलाड इलाके में लोगों के घरों में खाना बनाने का काम करती थीं। इसके बाद घर लौटकर अपने बीमार पति और बेटियों के देख रेख भी करतीं और फिर रात को ही अपने अगले दिन की शुरुआत की तैयारियां कर लेतीं। जिस अपार्टमेंट में दीपिका काम करती थीं, वहीँ एक महिला थीं संगीता व्यास जिन्होंने इनके कॉमेडी के हुनर को पहचाना। संगीता ने एक बार Maids और ड्राइवरों के लिए Talent Show रखा जिसमें दीपिका को अपने हुनर को दिखाने का सुनहरा अवसर मिला। दीपिका के इस प्रदर्शन को प्रसिद्द Stand-up Comedian आदिति मित्तल ने भी देखा जिन्होंने इन्हें एक बड़े स्टेज पर इसे पेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। बस फिर क्या था, एक गुमनाम सी "काम वाली बाई" रातोंरात Stand-up Comedian में बदल गयी। Stand-up Comedy के छुपे हुए हुनर ने फिलहाल दीपिका को काफी राहत दी है जिसके चलते...

अभावों में भी अपने सपनो को रखा ज़िंदा और जीवन में पाया एक ऊँचा मुकाम

              BY  MY COLLEGE NOTIFIER कई ऐसे भारतीय क्रिकेटर हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत के बलबूते अपने परिवार के साथ ही देश का नाम रोशन किया है.इन्ही में से एक हैं अहमदाबाद के  जसप्रीत बुमराह जिन्होंने बहुत ही कम समय में तेज गेंदबाज का ताज हासिल कर लिया। जसप्रीत बुमराह का जन्म अहमदाबाद में हुए था,  उन्हें बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। उनके दोस्तों को जहां बैटिंग करना अच्छा लगता था, वहीं बुमराह को गेंदबाज़ी करना बेहद ही पसंद करते थे। महज़ 7 साल की उम्र में उनके सिर से पिता का साया उठा गया, जिसके बाद  बुमराह की मां ने अपने दोनों बच्चों की परवरिश की। पिता की मौत के बाद घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी, उनकी मां जैसे तैसे करके अपने परिवार का खर्च चला रही थी। लेकिन बुमराह का अभी भी गेंदबाज़ी के प्रति लगाव कम नहीं हुआ था। बुमराह की मां एक प्राइमरी स्कूल में टीचर थीं और जसप्रीत भी उसी स्कूल में पढ़ते थे। स्कूल से घर आने के बाद बुमराह  दीवार पर ही गेंदबाज़ी करना शुरू कर देते थे, जिसकी वजह से मां की डांट भी सुननी पड़ती थ...

लिमिटेड रिसोर्स और रिपिटेड रिवीजन से शिखा बनीं UPSC टॉपर

            BY  MY COLLEGE NOTIFIER साल 2017 में दूसरे प्रयास में 16वीं रैंक के साथ सफलता पाने वाली शिखा सुरेन्द्रन ने शेयर की अपनी प्रिपरेशन स्ट्रेटजी.   केरल की शिखा जब यूपीएससी की प्रिपरेशन के बारे में बात करती हैं तो चीजों को इतना सरल बना देती हैं कि आपको लगेगा कोई भी इस परीक्षा को पास कर सकता है. हालांकि इससे उनकी मेहनत कम नहीं हो जाती पर दूसरे कैंडिडेट्स से इतर शिखा की बातें कम से कम हिम्मत जगाती हैं कि प्रयास सच्ची और सही दिशा में तो कोई भी इस परीक्षा में सफल हो सकता है. शिखा कहती हैं उनके पिताजी का सपना था कि वे इस क्षेत्र में जाएं पर उन्होंने कभी शिखा को इसके लिए फोर्स नहीं किया. हालांकि समय बीतने के साथ पिताजी का सपना कब शिखा का भी सपना बन गया उन्हें पता भी नहीं चला. बचपन में वे नहीं जानती थी कि डीएम या कलेक्टर कौन होता है पर बड़े होकर जब उन्हें इस क्षेत्र की डाइवर्सिटी और प्रेस्टीज के बारे में पता चला तो उन्होंने तय किया कि वे इस क्षेत्र में ही कैरियर बनाएंगी. चूंकि यूपीएससी परीक्षा का नेचर बहुत ही अनप्रिडिक्टेबल है, इसलिए पहले उन्होंने...

बिहार के एक छोटे से गाँव से उभरा बॉलीवुड का अनोखा सितारा

             BY MY COLLEGE NOTIFIER बॉलीवुड की चकाचौंध ने हमेशा ही अनगिनत कलाकारों को अपनी ओर खींचा है लेकिन इसमें सफलता उन्हीं को मिली है जिन्होंने अपने अथक परिश्रम और दृढ़ विश्वास के साथ इस ओर कदम बढ़ाया है। आज भारतीय फिल्म जगत में तेजी से उभरते अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपनी लगन ओर विश्वास के बल पर अपनी एक खास जगह बनाई है। बिहार के एक छोटे से गाँव गोपालगंज से इस कलाकार ने अपना सफर शुरू किया। बचपन से ही गाँव में ये नाटक आदि में गहरी रूचि लिया करते थे। इसलिए घर वालों की इच्छा के विरुद्ध अभिनय को ही अपना लक्ष्य बनाया। हालाँकि इन्होंने पटना स्थित Food & Craft Institute से डिप्लोमा लेकर दो साल तक पटना के ही मौर्या होटल में नौकरी भी की। लेकिन वे अभिनय के अपने जुनून को रोक नहीं सके और दिल्ली के NSD से अभिनय की यात्रा पर निकल पड़े। शुरूआती दौर में NSD के अंग्रेजी माहौल में इन्हें काफी तकलीफें भी हुई लेकिन अभिनय में अपनी कुशलता के चलते इन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। इसी दौरान साल 2004 में इन्हें अपनी पहली फिल्म "Run" की लिए मौका मिला जिसमें इनके अभिनय क...

40 बार असफल हुए लेकिन फिर भी कम नहीं हुआ हौंसला, ऐसे UPSC क्लियर कर बने IRS अफसर

                 BY MY COLLEGE NOTIFIER अगर हौंसले बुलंद हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। चाहे फिर वो कितनी भी बार हार जाए, लेकिन जीत को सपना जरूर देखता है और एक दिन अपने सपने को साकार भी कर लेता है। जैसे IRS अफसर अवध किशोर पवार ने कर दिखाया था। जानते हैं आप अवध किशोर पवार 40 बार असफल हुए, लेकिन कभी हार नहीं मानी और एक दिन सफलता हासिल की। आज हम आपको IRS अफसर अवध किशोर पवार के सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं। अवध किशोर पवार ने कम से कम 40 बार परीक्षा दी है और फेल हुए हैं, लेकिन एक दिन अपनी पूरी मेहनत से देश की सबसे मुश्किल परीक्षा माने जाने वाली UPSC को पास कर ही लिया और आज IRS अफसर की कुर्सी पर बैठे हैं। अपने बारे में बात करते हुए अवध किशोर पवार बताते हैं कि जब भी वो किसी रिक्शा चलाने वाले के बेटे ने UPSC की परीक्षा के लिए तैयारी, या पास होते हुए या उसे इंटरव्यू देते हुए देखा करते थे को उससे काफी प्रभावित होते थे। साथ ही काफी प्रेरित भी होते थे। Success Story of IRS officer Awadh Kishore Pawar अवध किशोर पवार बताते हैं कि वो शुरुआत से ही Civ...

गरीबी से जंग जीतकर IAS बने जूते बेचने वाले शुभम गुप्ता, जानें संघर्ष की कहानी

                  BY MY COLLEGE NOTIFIER  आज हम आपको एक ऐसे लड़के की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने गरीबी से दो-दो हाथ कर के कामयाबी का गले से लगाया है और अपने परिवार वालों को भी गर्व को एहसास करवाया है। एक समय ऐसा था कि इसके पास पढ़ने कर के लिए कुछ नहीं था और आज ये लड़का एक बड़ा अफसर बन चुका है। इस लड़के ने पिता का हाथ बंटाने काम में अपना पूरा सहयोग किया लेकिन उसने अफसर बनने के अपने सपने को भी जिंदा रखा। ये कहानी है शुभम गुप्ता की।  शुभम गुप्ता राजस्थान के रहने वाले हैं और उनके सर पर काफी कम उम्र में ही अपनी पिता के साथ मिलकर घर की जिम्मेदारियों को निभाने का भोज आ गिरा था, लेकिन उनके परिवार ने कभी शुभम को इन सभी जिम्मेदारियों की भट्टी में नहीं झोंका। परिवार के हालात को समझते हुए शुभम ने खुद यह निर्णय लिया और अपने पिता के साथ लग गए काम पर। आपको यह जान करा काफी हैरानी होगी कि शुभम ने AIR रैंक6 हालिस की। शुभम गुप्ता का बचपन भी जिम्मेदारियां निभाते बीता है, वेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बचपन से ही परिवार संभालने के लिए पिता के साथ कि...

94 साल कि उम्र में शुरु किया बिज़नेस, देश की बड़ी हस्तियां भी कर रही इस महिला की तारीफ

                BY  MY COLLEGE NOTIFIER बुढ़ापा एक ऐसी उम्र होती है जहां पर लोग अपने पोती पोतियों के साथ खेलना और तीर्थ यात्रा जैसी ख़्वाहिशे रखते हैं। क्योंकि समाज की धारणा यही है की बुढ़ापे को राम नाम के साथ बिता देना चाहिए। लेकिन जब दिल में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो आप किसी भी उम्र में कोई भी काम आसानी से कर सकते है। बस जरुरी है तो आपके अंदर से निकलने वाली उस आवाज़ की जो सिर्फ यही कहे “ कि हां मैं यह कर सकता/सकती हूं ” ऐसी ही एक आवाज़ सुनी है चंडीगढ़ की रहने वाली हरभजन कौर ने जिनकी उम्र 94 साल है। आपको जानकर यह हैरानी होगी कि वह इस उम्र में एक एंटरप्रेन्योर बनी है। क्योंकि उनकी अपनी चाहत थी कि वह जिंदगी में कभी अपने द्वारा किये गये काम से कुछ पैसे कमाएं। इसलिए आज वह बेसन की बर्फी और कई तरह के अचार बनाकर अपना बिज़नेस कर रही है।  ऐसे शुरु हुआ सफर एक बार बातों ही बातों में हरभज़न कौर से उनकी बेटी रवीना सूरी ने यह पूछ लिया कि आपको आज भी किस काम का अफसोस होता है कि जो आप जिंदगी में करना चाहती थी लेकिन किसी कारण वश नहीं कर पाई। उन्होंन...

16 वर्ष में पास की एम्स परीक्षा, 22 की उम्र में IAS और फिर नौकरी छोड़ बच्चों को फ्री कोचिंग देने लगे

                BY  MY COLLEGE NOTIFIER साल 2016 में जून के महीने का एक दिन था जब हर अखबार ने बड़ी बड़ी हेडलाइन के साथ छापा था कि देश के सबसे युवा आईएएस अफसर में गिने जाने वाले रोमन सैनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वजह थी आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे उन युवाओं को फ्री में कोचिंग देना जो पैसों की कमी से यहां तक नहीं पहुंच पाते। जिस रुतबे वाली नौकरी पाने को देश का हर युवा तरसता है, उन्होंने ये नौकरी फ्री कोचिंग स्टार्ट अप शुरू करने के लिये छोड़ दी। ये पहली बार था जब किसी युवा आइएएस अफसर ने इस तरह के किसी कारण से इस्तीफा दिया था। जिस कोचिंग संस्था में काम करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ी उसका नाम है अनएकेडमी जो आज नंबर वन डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है। वे इसके फाउंडर में से एक हैं। रोमन सैनी ने अपनी पढ़ाई करते हुए शिक्षा में बढ़ते पूंजीवाद और बाजारवाद के प्रभाव को महसूस किया था। शिक्षा सभी तक पहुंचे इसके लिए उन्होंने अपने इस फैसले को एक छोटा सा प्रयास बताया। रोमन सैनी ने 22 साल की उम्र में बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में यूपीएससी प...

इस तरह कड़ी मेहनत और संघर्ष झेल कर IAS अफसर बना चाय बेचने वाले का बेटा

                   BY  MY COLLEGE NOTIFIER  आपने कई अफसरो की कहानियां सुनी है जो कड़ी मेहनत से ऊंचाइयां छू रहे हैं और अपने घर वालों का नाम रोशन कर रहे हैं। इन अफरसों में कोई किसान का बेटा है तो कोई किसी दुकानदार का बेटा है। आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे हैं वो भी इस तरह के संघर्ष को झेलकर और कड़ी मेहनत से आज अफसर की कुर्सी पर बैठे हैं। हम बात कर रहे हैं यूपी की बरेली के एक छोटे से गांव सिरॉली के रहने वाले हिमांशु गुप्ता की। इस तरह कड़ी मेहनत और संघर्ष झेल कर IAS अफसर बना चाय बेचने वाले का बेटा हिमांशु गुप्ता अक्सर ही जब टीवी पर बड़े और सक्सेसफुल लोगों की जीवनशैली देखते थे तो उससे बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ करते थे। हिमांशु चाहते थे कि एक दिन वो भी ऐसी जिंदगी का हिस्सा बनें और सच्च भी यही निकला कि एक दिहाड़ी कमाने वाले के बेटे ने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। बल्कि उन्हें बुना और बहुत प्यार से बुना। आखिरकार अपने पिता के साथ टी-स्टॉल पर चाय बेचने वाला हिमांशु गुप्ता Union Public Service Commission Civil Service Exam प...

हिंदी मीडियम का छात्र अनिरुद्ध सिंह ऐसे बने IAS का टॉपर

                 BY  MY COLLEGE NOTIFIER आज हम जिन IAS Indian Administrative Service टॉपर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। उनके संघर्ष की कहानी कुछ अलग ही है। उनके लिए शुरूआत में UPSC पास करना आसान नहीं था। उन्होंने भी बाकी के तमाम छात्रों की तरह ही बेहद तैयारियां की उसके बाद कही जा कर उनको टॉपर का दर्जा मिला। हिंदी मीडियम होने के चलते किया परेशानियों को पार खास कर ये सफर उनके लिए काफी मुश्किलें खड़ी करता है जो हिंदी मीडियम के छात्र कहलाते हैं। हन ये बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इससे पहले भी हिंदी मीडियम के छात्रों को UPSC टॉप करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। खास कर इंटरव्यू का समय जो आपको इस बात की याद दिला देता है कि आपने अब केवल हिंदी मीडियम ही पढ़ा है। अंग्रेजी मीडियम अभी बाकी है, क्योंकि ज्यादातर इंटरव्यू अंग्रेजी में किया जाता है। UPSC की परीक्षा में अनिरुद्ध ने हासिल की थी ओवरऑल 146रैंक  ऐसा ही कुछ मुश्किलों भरा कानपुर के रहने वाले अनिरुद्ध सिंह के लिए भी रहा है। अनिरुद्ध सिंह सफल हिंदी मीडियम से UPSC ...