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IAS Success Story: नौकरी के साथ की तैयारी, रोशन कुमार ने ऐसे UPSC परीक्षा में बाजी मारी

      रोशन कुमार की यूपीएससी जर्नी खासी लंबी रही. साल 2013 से शुरू हुआ उनका यह सफर 2018 में मंजिल पर पहुंचा. उन्हें सफलता मिली पांचवें प्रयास में. इस दौरान रोशन ने कई बार असफलताओं का सामना किया लेकिन फेलियर का मातम मनाने की बजाय वापस उठ खड़े हुए और हर बार दोगुने जोश से तैयारी में जुट गए. अंततः साल 2018 में रोशन कुमार ने 114वीं रैंक के साथ यह परीक्षा पास की और इस रैंक के अंतर्गत उन्हें आईपीएस यानी इंडियन पुलिस सर्विस एलॉट हुई. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में रोशन ने जॉब के साथ कैसे तैयारी करें, इस मुद्दे पर चर्चा की. बार-बार हुए असफल पर नहीं मानी हार – रोशन कुमार की सफलता की कहानी बहुत सारी असफलताओं की भी कहानी है. लेकिन इस सफर में उनके जज्बे की दाद देनी होगी जो बार-बार गिरकर भी नहीं टूटा. इस दौरान रोशन ने कभी भी नौकरी छोड़ने का नहीं सोचा और अपने पांचों अटेम्प्ट जॉब के साथ ही दिए अगर रोशन के प्रयासों की बात करें तो पहले दो अटेम्प्ट्स में रोशन प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पाए. इसके बाद के प्रयासों में वे मेन्स परीक्षा नहीं निकाल पाए और अंततः पांचवें प्रयास में साल 201...

IIT से IIM और फिर पहले प्रयास में IAS, प्रत्युष पांडे ने ऐसे तय किया निरंतर सफलताओं का सफर

                    BY   MY COLLEGE NOTIFIER केवल 24 साल की उम्र में नई दिल्ली के प्रत्युष पांडे ने इतना कुछ हासिल कर लिया है, जिसकी लोग केवल कल्पना ही करते रह जाते हैं. जहां ताउम्र लोग एक सफलता के लिए तरसते हैं वहीं प्रत्युष ने मात्र 24 साल की उम्र में अपने क्षेत्र के सबसे नामी संस्थानों में एडमिशन लेकर दिखा दिया कि कुछ लोग केवल सफल होने के लिए ही बने होते हैं. हालांकि इसके पीछे उनकी सालों की तपस्या और कड़ी मेहनत होती है फिर भी साल दर साल यूं सफल होते जाना आसान नहीं होता. प्रत्युष ने कानपुर आईआईटी से ग्रेजुएशन किया है और आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए. दोनों ही संस्थान अपने क्षेत्र में सर्वोत्तम माने जाते हैं. इसके बाद जिस साल प्रत्युष का पीजी पूरा हुआ उसी साल उन्होंने अपने पहले प्रयास में ही यूपीएससी परीक्षा भी पास की. यही नहीं वे 21वीं रैंक के साथ टॉपर्स की सूची में भी शामिल हुए. मार्च 2019 में उन्होंने एमबीए किया और इसी साल बने आईएएस. कड़ी मेहनत और धैर्य के अलावा आइये जानते हैं क्या रहे प्रत्युष के सक्सेज टूल. सही रास्ता चुनने के...

हौसलें अगर बुलंद हों और जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता।

             BY   MY COLLEGE NOTIFIER             तुम कहीं की कलेक्टर हो क्या? ये ताना सुनने के बाद प्रियंका शुक्ला बनी  IAS ऑफिसर   हौसलें अगर बुलंद हों और जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता। कुछ ऐसा ही कर दिखाया  IAS ऑफिसर प्रियंका शुक्ला ने, तो आइये जानते हैं  प्रियंका शुक्ला के जीवन की कहानी। IAS बन चुकीं प्रियंका शुक्ला का जन्म हरिद्वार में हुआ था, और वो वहीं पली-बढ़ीं। उनकी शुरुआती शिक्षा भी वहीं से हुई। प्रियंका शुक्ला के पिता की दिली ख्वाहिश थी कि उनकी बेटी बड़ी होकर डीएम बने। मगर उस समय के हालत को देखते हुए प्रियंका शुक्ला ने मेडिकल के क्षेत्र में कैरियर बनाने का फैसला लिया। साल 2006 में प्रियंका ने लखनऊ की प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज्स मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस किया था। एमबीबीएस पूरा कर लेने के बाद प्रियंका शुक्ला लखनऊ में ही प्रैक्टिस करने लगीं थीं। इस प्रैक्टिस के दौरान ही उनके साथ कुछ ऐसी घटना घटी,जिसके बाद उन्होंने IAS ऑफिसर बनने की कसम खा ल...

सेल्फ स्टडी और यूट्यूब से पढ़कर रोमा बनीं UPSC टॉपर

         BY   MY COLLEGE NOTIFIER यूपीएससी कैंडिडेट्स की सफलता की कहानी जब सामने आती है तो उनमें से अधिकतर कैंडिडेट्स यह कहते पाये जाते हैं कि प्रिपरेशन के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से एकदम दूरी बना ली थी. अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स डिलीट कर दिये थे और यहां बहुत समय बर्बाद होता है आदि. लेकिन आज हम आपको जिस कैंडिडेट से मिलाने जा रहे हैं वे इसी सोशल मीडिया के एक प्रचलित अंग यूट्यूब को अपनी सफलता का श्रेय देती हैं. वे इंटरनेट से पढ़ाई को गलत नहीं मानती बल्कि कहती हैं कि पूरी प्रिपरेशन के दौरान उन्हें जहां भी समस्या हुई या जो टॉपिक समझ नहीं आया उन्होंने हमेशा उसे यूट्यूब पर सर्च करके पढ़ा. आज जानते हैं रोमा श्रीवास्तव से उनकी यूपीएससी जर्नी के बारे में   पहले भी हो चुकी हैं चयनित – दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में रोमा कहती हैं कि साल 2019 की सफलता उन्हें चौथे प्रयास में मिली है. इसके पहले भी दो बार रोमा यूपीएससी सीएसई परीक्षा में सेलेक्ट हो चुकी हैं और रैंक के अनुसार उन्हें सेवाएं एलॉट हुई थी. साल 2017 में पहली बार चयन होने पर रोमा को मिली थी इ...

IIT से IAS ऑफिसर तक, संघर्ष भरी थी अभिषेक सराफ की डगर

              BY   MY COLLEGE  NOTIFIER भोपाल के अभिषेक ने यूं तो अपने जीवन में बहुत सी सफलताएं हासिल की पर उनका यूपीएससी का सफर खासा लंबा और कठिनाई भरा रहा. जैसे की यूपीएससी एस्पिरेंट्स कहते ही हैं कि यह जर्नी हर मायने में खास होती है. अगर आप चयनित नहीं भी होते तो भी इतना कुछ सीख जाते हैं कि जीवन पहले जैसा नहीं रह जाता, आप एक इंसान के तौर पर बहुत इम्प्रूव कर जाते हैं. अभिषेक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. चूंकि अभिषेक को यूपीएससी में अपनी मनचाही रैंक मिलने में चार साल लग गए इसलिए वे इसकी तैयारी के विषय में बहुत बारीकी से जान गए. एक-एक हिस्से को वे इतनी भली प्रकार समझा देते हैं कि किसी नये एस्पिरेंट को ज्यादा कठिनाई न हो. अभिषेक ने कानपुर आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद वे रेलवे में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ट्रेनी के पद पर काम करने लगे. यहां काम करने के दौरान ही कुछ कारणों से उनका यूपीएससी परीक्षा देने का मन किया. इस प्रकार शुरू हुआ अभिषेक का यूपीएससी का यह सफर जो चार साल के बाद पड़ाव तक पहुंचा. अपना मोटिवेशन साफ कर लें ...

आईएएस बनने के अपने सपने के लिए अपना घर छोड़ दिया था.

            BY   MY COLLEGE NOTIFIER दिल्ली से सटे मेरठ शहर में एक कस्बा है किठौर. इसी कस्बे के पास एक गांव की लड़की की बगावत की कहानी तमाम लड़कियों के लिए नजीर बन गई है. ये लड़की है संजूरानी वर्मा, जिसने आईएएस बनने के अपने सपने के लिए अपना घर छोड़ दिया था.  जी हां, संजू रानी ने अपने सपनों के लिए पुरानी परंपराओं और सोच से बगावत की, अपनों का विरोध झेला लेकिन बिना डिगे अपने लक्ष्य की दिशा में बढ़ गईं. वो साल 2020 में यूपी पीसीएस की परीक्षा में सेलेक्ट होकर एक पीसीएस अफसर बन गई हैं, लेकिन उनका अभी कलेक्टर बनने का सपना बाकी है.  aajtak.in से बातचीत में संजूरानी ने कहा कि मेरे घरवाले मेरी शादी करना चाहते थे लेकिन मैं आगे की पढ़ाई करना चाहती थी. फिर साल 2013 में जब मेरी मां की डेथ हुई तो मैंने सोचा कि मैं अलग रहूं, क्योंक‍ि मेरी सोच उनसे (परिवार के पुरुषों) से नहीं मिलती. वो कहती हैं कि सोच आज भी कम मिलती है. परिवार के लोग मेरी शादी करना चाहते थे. तभी मैंने घर छोड़ा और दिल्ली में आकर तैयारी शुरू कर दी.  वो बताती हैं कि यहां आकर अपना खर्च ...

पहले ही प्रयास में मात्र एक साल की तैयारी से 22 साल की अनन्या बनीं UPSC टॉपर

                     BY   MY COLLEGE NOTIFIER प्रयागराज की अनन्या सिंह ने 22 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा में 51वीं रैंक के साथ टॉप किया. अनन्या आज बता रही हैं कि कैसे एक से डेढ़ साल की तैयारी में भी इस परीक्षा को पास किया जा सकता है. यूपीएससी की तैयारी जहां किसी-किसी के लिए एक लंबी जर्नी हो जाती है, वहीं कुछ कैंडिडेट ऐसे भी होते हैं जो स्मार्ट वर्क, हाडवर्क और प्रॉपर स्ट्रेटजी के बलबूते पहले ही साल में मंजिल पा लेते हैं. ऐसे स्टूडेंट्स की इस सफलता में बहुत से फैक्टर काम करते हैं पर सबसे अहम होता है हार्ड वर्क प्लस स्मार्ट वर्क. प्रयागराज की अनन्या भी ऐसी ही एक कैंडिडेट हैं जिन्होंने सही दिशा में प्लानिंग और कड़ी मेहनत से पहले ही प्रयास में न सिर्फ यूपीएससी परीक्षा पास की बल्कि अपने आईएएस बनने के सपने को भी साकार किया. अनन्या बचपन से ही आईएएस बनना चाहती थी और ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष से उन्होंने इस दिशा में प्रयास भी शुरू कर दिए थे. जिसमें सबसे कॉमन लेकिन महत्वपूर्ण था न्यूज पेपर पढ़न...

लिमिटेड रिसोर्स और रिपिटेड रिवीजन से शिखा बनीं UPSC टॉपर

            BY  MY COLLEGE NOTIFIER साल 2017 में दूसरे प्रयास में 16वीं रैंक के साथ सफलता पाने वाली शिखा सुरेन्द्रन ने शेयर की अपनी प्रिपरेशन स्ट्रेटजी.   केरल की शिखा जब यूपीएससी की प्रिपरेशन के बारे में बात करती हैं तो चीजों को इतना सरल बना देती हैं कि आपको लगेगा कोई भी इस परीक्षा को पास कर सकता है. हालांकि इससे उनकी मेहनत कम नहीं हो जाती पर दूसरे कैंडिडेट्स से इतर शिखा की बातें कम से कम हिम्मत जगाती हैं कि प्रयास सच्ची और सही दिशा में तो कोई भी इस परीक्षा में सफल हो सकता है. शिखा कहती हैं उनके पिताजी का सपना था कि वे इस क्षेत्र में जाएं पर उन्होंने कभी शिखा को इसके लिए फोर्स नहीं किया. हालांकि समय बीतने के साथ पिताजी का सपना कब शिखा का भी सपना बन गया उन्हें पता भी नहीं चला. बचपन में वे नहीं जानती थी कि डीएम या कलेक्टर कौन होता है पर बड़े होकर जब उन्हें इस क्षेत्र की डाइवर्सिटी और प्रेस्टीज के बारे में पता चला तो उन्होंने तय किया कि वे इस क्षेत्र में ही कैरियर बनाएंगी. चूंकि यूपीएससी परीक्षा का नेचर बहुत ही अनप्रिडिक्टेबल है, इसलिए पहले उन्होंने...

40 बार असफल हुए लेकिन फिर भी कम नहीं हुआ हौंसला, ऐसे UPSC क्लियर कर बने IRS अफसर

                 BY MY COLLEGE NOTIFIER अगर हौंसले बुलंद हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। चाहे फिर वो कितनी भी बार हार जाए, लेकिन जीत को सपना जरूर देखता है और एक दिन अपने सपने को साकार भी कर लेता है। जैसे IRS अफसर अवध किशोर पवार ने कर दिखाया था। जानते हैं आप अवध किशोर पवार 40 बार असफल हुए, लेकिन कभी हार नहीं मानी और एक दिन सफलता हासिल की। आज हम आपको IRS अफसर अवध किशोर पवार के सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं। अवध किशोर पवार ने कम से कम 40 बार परीक्षा दी है और फेल हुए हैं, लेकिन एक दिन अपनी पूरी मेहनत से देश की सबसे मुश्किल परीक्षा माने जाने वाली UPSC को पास कर ही लिया और आज IRS अफसर की कुर्सी पर बैठे हैं। अपने बारे में बात करते हुए अवध किशोर पवार बताते हैं कि जब भी वो किसी रिक्शा चलाने वाले के बेटे ने UPSC की परीक्षा के लिए तैयारी, या पास होते हुए या उसे इंटरव्यू देते हुए देखा करते थे को उससे काफी प्रभावित होते थे। साथ ही काफी प्रेरित भी होते थे। Success Story of IRS officer Awadh Kishore Pawar अवध किशोर पवार बताते हैं कि वो शुरुआत से ही Civ...

गरीबी से जंग जीतकर IAS बने जूते बेचने वाले शुभम गुप्ता, जानें संघर्ष की कहानी

                  BY MY COLLEGE NOTIFIER  आज हम आपको एक ऐसे लड़के की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने गरीबी से दो-दो हाथ कर के कामयाबी का गले से लगाया है और अपने परिवार वालों को भी गर्व को एहसास करवाया है। एक समय ऐसा था कि इसके पास पढ़ने कर के लिए कुछ नहीं था और आज ये लड़का एक बड़ा अफसर बन चुका है। इस लड़के ने पिता का हाथ बंटाने काम में अपना पूरा सहयोग किया लेकिन उसने अफसर बनने के अपने सपने को भी जिंदा रखा। ये कहानी है शुभम गुप्ता की।  शुभम गुप्ता राजस्थान के रहने वाले हैं और उनके सर पर काफी कम उम्र में ही अपनी पिता के साथ मिलकर घर की जिम्मेदारियों को निभाने का भोज आ गिरा था, लेकिन उनके परिवार ने कभी शुभम को इन सभी जिम्मेदारियों की भट्टी में नहीं झोंका। परिवार के हालात को समझते हुए शुभम ने खुद यह निर्णय लिया और अपने पिता के साथ लग गए काम पर। आपको यह जान करा काफी हैरानी होगी कि शुभम ने AIR रैंक6 हालिस की। शुभम गुप्ता का बचपन भी जिम्मेदारियां निभाते बीता है, वेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बचपन से ही परिवार संभालने के लिए पिता के साथ कि...

इस तरह कड़ी मेहनत और संघर्ष झेल कर IAS अफसर बना चाय बेचने वाले का बेटा

                   BY  MY COLLEGE NOTIFIER  आपने कई अफसरो की कहानियां सुनी है जो कड़ी मेहनत से ऊंचाइयां छू रहे हैं और अपने घर वालों का नाम रोशन कर रहे हैं। इन अफरसों में कोई किसान का बेटा है तो कोई किसी दुकानदार का बेटा है। आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे हैं वो भी इस तरह के संघर्ष को झेलकर और कड़ी मेहनत से आज अफसर की कुर्सी पर बैठे हैं। हम बात कर रहे हैं यूपी की बरेली के एक छोटे से गांव सिरॉली के रहने वाले हिमांशु गुप्ता की। इस तरह कड़ी मेहनत और संघर्ष झेल कर IAS अफसर बना चाय बेचने वाले का बेटा हिमांशु गुप्ता अक्सर ही जब टीवी पर बड़े और सक्सेसफुल लोगों की जीवनशैली देखते थे तो उससे बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ करते थे। हिमांशु चाहते थे कि एक दिन वो भी ऐसी जिंदगी का हिस्सा बनें और सच्च भी यही निकला कि एक दिहाड़ी कमाने वाले के बेटे ने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। बल्कि उन्हें बुना और बहुत प्यार से बुना। आखिरकार अपने पिता के साथ टी-स्टॉल पर चाय बेचने वाला हिमांशु गुप्ता Union Public Service Commission Civil Service Exam प...

हिंदी मीडियम का छात्र अनिरुद्ध सिंह ऐसे बने IAS का टॉपर

                 BY  MY COLLEGE NOTIFIER आज हम जिन IAS Indian Administrative Service टॉपर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। उनके संघर्ष की कहानी कुछ अलग ही है। उनके लिए शुरूआत में UPSC पास करना आसान नहीं था। उन्होंने भी बाकी के तमाम छात्रों की तरह ही बेहद तैयारियां की उसके बाद कही जा कर उनको टॉपर का दर्जा मिला। हिंदी मीडियम होने के चलते किया परेशानियों को पार खास कर ये सफर उनके लिए काफी मुश्किलें खड़ी करता है जो हिंदी मीडियम के छात्र कहलाते हैं। हन ये बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इससे पहले भी हिंदी मीडियम के छात्रों को UPSC टॉप करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। खास कर इंटरव्यू का समय जो आपको इस बात की याद दिला देता है कि आपने अब केवल हिंदी मीडियम ही पढ़ा है। अंग्रेजी मीडियम अभी बाकी है, क्योंकि ज्यादातर इंटरव्यू अंग्रेजी में किया जाता है। UPSC की परीक्षा में अनिरुद्ध ने हासिल की थी ओवरऑल 146रैंक  ऐसा ही कुछ मुश्किलों भरा कानपुर के रहने वाले अनिरुद्ध सिंह के लिए भी रहा है। अनिरुद्ध सिंह सफल हिंदी मीडियम से UPSC ...